ज़िंदगी इसी का नाम है,
कोई जीता, कोई पाता है...!!
चलती रहती, इस नैया में
ख़ुद ही माँझी बन जाता है....!!
हवाओं के थपेड़े, उठती लहरों का ज्वार
सब कुछ तो होते हैं, सफलता के उदगार.!
लगा गले इन, लहरों को,
बन जा इनका ही मझदार..!!
नाविक नहीं, तू माँझी है
लहरों से लड़ना है, तेरा अधिकार...!!!
तू बढ़ता रह, तू बढ़ता रह
यहीं होगी, तेरी विजय अपार...!!!
कोई जीता, कोई पाता है...!!
चलती रहती, इस नैया में
ख़ुद ही माँझी बन जाता है....!!
हवाओं के थपेड़े, उठती लहरों का ज्वार
सब कुछ तो होते हैं, सफलता के उदगार.!
लगा गले इन, लहरों को,
बन जा इनका ही मझदार..!!
नाविक नहीं, तू माँझी है
लहरों से लड़ना है, तेरा अधिकार...!!!
तू बढ़ता रह, तू बढ़ता रह
यहीं होगी, तेरी विजय अपार...!!!
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