Tuesday, 21 June 2016

ज़िंदगी माँझी की

ज़िंदगी इसी का नाम है,
कोई जीता, कोई पाता है...!!

चलती रहती, इस नैया में
ख़ुद ही माँझी बन जाता है....!!

हवाओं के थपेड़े, उठती लहरों का ज्वार
सब कुछ तो होते हैं, सफलता के उदगार.!

लगा गले इन, लहरों को,
बन जा इनका ही मझदार..!!

नाविक नहीं, तू माँझी है
लहरों से लड़ना है, तेरा अधिकार...!!!

तू बढ़ता रह, तू बढ़ता रह
यहीं होगी, तेरी विजय अपार...!!!⁠⁠⁠⁠

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