तू जलती है, फिर बुझती है,
बूझकर भी, फिर जल जाती है....!!!
तू आशा है या निराशा है,
मेरे मन की एक अभिलाषा है...!!
तेरे सपनो के संग जीता हूँ,
अपनों के संग बिछड़ता हूँ...!!
चाह कर भी मैं, मिल ना सका
क्योंकि........
तू दिलासा की अभिलाषा है...!!
आभासी तेरे सपनो में,
मेरे मन के इन थपेड़ों में..!!
ढूँढ रहा, अविलंब तुम्हें,
उन अभिलाषाओं के घेरे में...!!!
अभिलाषा नहीं, तू आशा है,
मेरे जीवन के इस अशकों में...!!
मेरा जीवन ही एक आशा है
मेरा जीवन ही एक अभिलाषा है...!!
क्योंकि......
तू जलती जलती बुझती है,
और...
बुझती बुझती जलती है....!!!!
बूझकर भी, फिर जल जाती है....!!!
तू आशा है या निराशा है,
मेरे मन की एक अभिलाषा है...!!
तेरे सपनो के संग जीता हूँ,
अपनों के संग बिछड़ता हूँ...!!
चाह कर भी मैं, मिल ना सका
क्योंकि........
तू दिलासा की अभिलाषा है...!!
आभासी तेरे सपनो में,
मेरे मन के इन थपेड़ों में..!!
ढूँढ रहा, अविलंब तुम्हें,
उन अभिलाषाओं के घेरे में...!!!
अभिलाषा नहीं, तू आशा है,
मेरे जीवन के इस अशकों में...!!
मेरा जीवन ही एक आशा है
मेरा जीवन ही एक अभिलाषा है...!!
क्योंकि......
तू जलती जलती बुझती है,
और...
बुझती बुझती जलती है....!!!!
No comments:
Post a Comment